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Thursday, June 28, 2012


ॐ साईं राम

१४ जुलाई, मँगलवार, १९१४-
नागपुर-अमरावती

मैं प्रातः ७ बजे नागपुर पहुँचा। वर्धा से जो गाड़ी जुड़ी, उसमें मैं एल॰ सी॰ बूपत से मिला। वह, मैं और दोरले बूटी की गाड़ी में गए। वह बूटी के महल के पास उतर गए, और मैं और दोरले वाड़े में चले गए। मैं बैठ कर आज की दूसरी याचिका को देखने लगा। मुवक्किल आए और उन्होंने पैसा अदा किया। भोजन के बाद मैं और दोरले न्यायलय गए और शीघ्र ही हमारे मुकद्दमें की सुनवाई हुई। जनाब बी॰के॰ भोसे हमारी ओर से प्रस्तुत हुए। ढिल्लों, जोशी और अभ्यँकर दूसरी ओर से प्रस्तुत हुए। जनाब भोसे ने न्यायलय को बड़ी सक्षमता से सँबोधित किया। श्री ढिल्लों ने जवाब दिया और जोशी ने उसमें कुछ जोड़ा, उन्होंने कहा था कि वह कुछ शब्द कहेंगे, पर वह एक भाषण जितना लम्बा हो गया। इसने बहुत समय ले लिया और जब तक उन्होंने समाप्त किया तब तक शाम के ५ बज गए। 

हम बूटी के वाड़े तक गए। एल॰सी॰ बापत पुनः राजा राम पुस्तकालय के पास कहीं चले गए। श्रीमान अभ्यँकर मुझसे किलने आए और हम देर तक बातें करते रहे। फिर बारिश भी होने लगी। बाद में डा॰ मूँजा आए और चुनाव के विषय में बात करते रहे।

सावत राम रामप्रताप के कर्मक हमें मिलने के लिए आए और बैठ कर बात करते रहे। गणपत राव नारके यहाँ हैं, और सभी बच्चे भी। गोपाल राव बूटी शिरडी में हैं। मैं शिरडी के साईं महाराज के बारे में देर तक गणपत राव नारके के साथ बात करता रहा। वे एक महान सन्त हैं रात ९ बजे मैं और दोरले रेलवे स्टेशन पहुँचे और ९॰५० की गाड़ी ली हम यहाँ दिन निकलते ही पहुँच गए। बडेरा में मैं बेदोरकर कान्गा और अन्य लोगों से मिला।

जय साईं राम