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Friday, March 12, 2010

Shirdi Diary (Khaparde's Daily Diary) in Hindi

ॐ साईं राम!!!


Khaparde's Shirdi Diary~~~खापर्डे शिरडी डायरी~~~
८ दिसम्बर , १९११~~~

मैं कल और परसों कहना भूल गया कि उपासनी वैद्य , जो अमरावती में थी , यहाँ हैं और मेरे यहाँ पहुँचने के तुरंत बाद मिलें |हम लोग बातचीत करने बैठे | उन्होंने मुझे अमरावती छोड़ने के बाद से अपनी कहानी संक्षेप में बतलाई कि किस तरह वे ग्वालियर स्टेट गए , किस तरह उन्होंने एक गाँव खरीदा उससे कोइ आमदनी नहीं हुई |कैसे उनकी एक महात्मा से भेंट हुई , कैसे वे बीमार पद गए , कैसे उन्होंने सभी इकाज आज़माए , कितने ही साधू और महात्माओं के पास गा , आखिर में किस तरह साईं महाराज ने किस तरह अपने हाथों में लिया , कैसे उनमें सुधार हुआ और अब यहाँ रहने की आज्ञा का पालन कर रहे हैं |
उन्होंने संस्कृत में साईं महाराज के एक स्तोत्र की रचना की है | हम सब जल्दी उठ गए और कांकड़ आरती में में सम्मिलित होने के लिए गए | यह बहुत ही सुखकर है | मैंने प्रार्थना की , स्नान किया और साईं महाराज के बाहर जाते हुए दर्शन किए | और फिर उनके लौटने के बाद , और एक बार फिर दोपहर में | साईं महाराज मेरी और देखते हुए बोले " क्यों सरकार ! " फिर उन्होंने सामान्य उपदेश दिया कि मुझे वैसे ही रहना चाहिए जैसे ईश्वर मुझको रखे , और फिर कहा कि जो आदमी अपने परिवार से जुड़ा है उसे बहुत कुछ सहन करना पड़ता है वगैरह वगैरह , और फिर एक अमीर व्यक्ति की कहानी बतलाई जो शाम तक भूखा रहा , अपने लिए भोजन बनाया और एक मोटी रोटी खाई , इन सबके पीछे कारण कोइ अस्थाई परेशानी थी | हमने शाम को साईं महाराज के फिर दर्शन किए और दीक्षित द्वारा बनवाई वाडे के बरामदे में बैठे | बंबई के दो सज्जन एक सितार लाए और उसे बजाने लगे , भजन किए | श्री ठोसर , जिन्हें मैं हज़रात कहता हूँ , ने भी बहुत सुन्दर गायन किया और भीष्म ने एनी दिनों की तरह भजन किए | आधी रात तक समय बहुत आनन्द से बीत गया | श्री ठोसर बहुत ही अच्छे साथी हैं | मैंने अपने पुत्र बलवंत , बंबई के सज्जन और अन्य लोगों के साथ चिंतन मनन आदि के बारे में लम्बी वार्ता की |


जय साईं राम!!!